मजलिस गरीब की हो या अमीर की भेदभाव न करें
करंट विज़न संवाददाता
इटावा। पक्की सराये स्थित बड़े इमामबाड़े में सोजख्वान तसलीम रज़ा की ओर से मजलिस शौहदाये कर्बला का आयोजन किया गया जिसका इंतजाम अलीका बॉम्बे कलेक्शन द्वारा किया गया। मजलिस में तक़रीर करते हुए मुंबई से आये मौलाना शाहिद हसन रिज़वी ने कहा मौला अली ने अल्लाह से सिर्फ एक ही दुआ मांगी तो अल्लाह ने अली को अब्बास जैसा बेटा दिया। मौला अब्बास कर्बला में 9 लाख लश्कर के मुक़ाबले में बिना असलहे के अकेले गए और कहा मैं जब्बार की हैबत अली की तलब हूं, जुल्फिकार के मालिक की तलवार हूं, मैं उसका बेटा हूं जिसके घोड़े की कसम अल्लाह ने कुरान में खाई, यह सुनकर 9 लाख लश्कर की धड़कने ठहर गईं। अब्बास वो हैं जिनके लिए इमाम हुसैन का इशारा हुक्म होता था। अब्बास चाह लेते तो हुसैन के दुश्मनों को पलक झपकते दुनिया से साफ कर देते। अब्बास पूरी जिंदगी हुसैन के पीछे पीछे चले, यहां तक कि पैदा भी हुसैन के बाद हुए। आशूर के दिन हुसैन ने कहा अब्बास अब जब भी मेरा जुलूस निकलेगा तुम्हारा अलम आगे होगा मेरा ताजिया पीछे होगा। इमाम हुसैन ने कर्बला में चिराग बुझाकर बुढ़ापे को दफन कर दिया, हुसैनी लश्कर में कोई बूढ़ा नही होता। मौलाना शाहिद रिज़वी ने कहा नमाज मजलिस को कभी कजा न करें, मजलिस गरीब की हो या अमीर की भेदभाव न करें, मजलिस दुश्मन भी कराए तो खुलूस से शिरकत करें। मौलाना ने इमाम हुसैन की बेटी सकीना के ऊपर हुये जुल्म को ऐसे बयान किया कि मजलिस में मौजूद भीड़ की आंखें आंसुओं ने नम हो गई। मजलिस का शुभारंभ तसलीम रज़ा, सलीम रज़ा ने सोजख्वानी से किया। तनवीर हसन व राहिल सगीर ने नोहाख्वानी की। संचालन का दायित्व मौलाना अनवारुल हसन जैदी इमामे जुमा इटावा ने निभाया। मजलिस की व्यवस्था अलीका शोरूम के आले मोहम्मद रिज़वी बिटटू, हाजी अली सज्जाद, अली इबाद, आसिम रज़ा, मोहम्मद जमील ने की। मजलिस में अल्हाज कमर अब्बास नकवी करबलाई, हाजी अरशद मरगूब, समर अब्बास, शावेज़ नक़वी, शारिक सगीर शानू, तहसीन रज़ा, आतिफ़ एड., नजमुल हसन, शादाब हसन, अयाज हुसैन, हम्माद, सफीर हैदर सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। मजलिस में तक़रीर करते मौलाना शाहिद हसन रिज़वी मुंबई।
