इमाम हुसैन का नासिर वो है जो उनकी खुशी में खुश हो, गम में आंसू बहाए – मौलाना तनवीर

शरीफ मंज़िल सैदबाड़ा में हुआ मजलिसों का आयोजन

करंट विज़न संवाददाता

इटावा। शहीदे आज़म इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला की याद में मेंहदी अब्बास, शीलू और समर सगीर व राहिल सगीर की ओर से शरीफ मंज़िल सैदबाड़ा स्थित इमामबाड़े में मजलिसों का आयोजन किया गया।
मेहदी अब्बास की ओर से आयोजित मजलिस में तक़रीर करते हुए लखनऊ से आये मौलाना तनवीर अब्बास नजफी ने कहा नमाज, रोजे का मतलब, हज की शान, कुरान की तिलावत की फजीलत, फर्श ए अज़ा का मकसद बताया तो जा सकता है लेकिन किसी को जबरन बुलाया नहीं जा सकता। दीन ने नमाज और रोजे की एहमियत बताई। इमाम हुसैन फरमाते हैं मेरा नासिर (समर्थक) वो है जो मेरी खुशियों में खुश हो और मेरे गम में आंसू बहाए। तीन शाबान को खुशी मनाना और आशूर को गम मनाना नासिर होने का सुबूत है। कर्बला के नासिर अंसार और आज के नासिर अजादार कहलाये गए। मौलाना तनवीर अब्बास ने कहा मौला अली ने अल्लाह ने सिर्फ कर्बला के लिए मौला अब्बास को मांगा। कर्बला में मौला अब्बास को जंग की इजाजत नहीं मिली, इमाम हुसैन ने सिर्फ बच्चों के लिए पानी लाने की इजाजत दी। अली वाले जिसे मानते हैं डंके की चोट पर मानते है। एहलेबैत ने वही किया जो अल्लाह चाहता है। मरहूम सगीरुल हसन द्वारा स्थापित और समर सगीर व राहिल सगीर की ओर से आयोजित मजलिस में मौलाना अनवारुल हसन जैदी इमामे जुमा इटावा ने तकरीर की। मजलिसों में तसलीम रज़ा, सलीम रज़ा, जहूर नक़वी, सलमान रिज़वी ने सोजख्वानी की। वसीम जाफरी ग्वालियर, तनवीर हसन, अख्तर अब्बास रिज़वी ने नोहा ख्वानी की। मजलिसों में अल्हाज कमर अब्बास नकवी करबलाई, हाजी अरशद मरगूब, राहत अक़ील, शावेज़ नक़वी, एहतराम हुसैन आगरा, सुहेल जैदी फर्रूखाबाद, मुशीर हैदर, आगा हसन अब्बास, मो. मियां, तहसीन रज़ा, पिंकू, बाबू, अयाज हुसैन, शौजब रिज़वी, शब्बर अक़ील, अदनान जाफरी, आतिफ एड., हम्माद, सैफू, शाजू, काशिब, शारिब सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। मजलिस में तक़रीर करते मौलाना तनवीर अब्बास नजफी।

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