उम्मीद सफ़लता की मज़बूत डोर है – भगवान दास

 जानकारी देते भगवान दास शर्मा प्रशांत

करंट विज़न संवाददाता

इटावा। उम्मीद सफलता की ही नहीं बल्कि जीवन की भी मजबूत डोर है। जहा उम्मीद और आशा समाप्त हो जाती है वहां जीवन भी समाप्त हो जाता है। जैसे डूबते को तिनके का सहारा होता है , वैसे ही असफल होते व्यक्ति को उम्मीद का सहारा होता है। भगवान दास शर्मा प्रशांत ने कहा उम्मीद हमारे अंतर्मन को सकारात्मक ऊर्जा देता है।सफ़लता की उम्मीद लगाए प्रयासरत व्यक्ति एक न एक दिन अवश्य ही सफ़ल होता है, यह निश्चय है। हम शरीर से कितने भी दुबले पतले क्यों न हो लेकिन यदि मन से मजबूत है तो सारे कार्य कर सकते है। इसके कई जीवंत उदाहरण मिल जाएगे चाहे वह निक, हेलन किलर,अरुणिमा सिन्हा, या शीतला देवी हो, मंजिल मिलनी तो सुनिश्चित है। बशर्ते वो उम्मीद की डोर थामे अपने मन से कभी हार ना मानें। इसी लिए कहा गया कि उम्मीद की एक किरण उस आकाशदीप की भांति है जो सागर में भटके राही को किनारे तक पहुंचा देती है। उम्मीद वह आत्म शक्ति है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का साहस देती है। मन में आशा का दीप जलता रहे तो असफलता भी हार मान लेती है। उम्मीद, मेहनत और धैर्य का हाथ थामकर व्यक्ति को सफलता की मंज़िल तक पहुँचा देती है। उम्मीद सफ़लता का शाश्वत सूत्र है।

 

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