
करंट विज़न संवाददाता
इमरान खान
इटावा। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद द्वारा बिजली बिलों पर जून माह से 10% ईंधन अधिभार लगाने की घोषणा के विरोध में व्यापारियों ने कड़ा रोष व्यक्त किया है। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिला अध्यक्ष आलोक दीक्षित के नेतृत्व में दर्जनों व्यापारियों ने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग को संबोधित सात सूत्रीय ज्ञापन अधीक्षण अभियंता श्री ऋषभदेव को सौंपा।
व्यापारियों ने आरोप लगाया कि ईंधन अधिभार लागू करने से पूर्व नियामक आयोग से अनुमति नहीं ली गई, जो नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि पहले से ही बिजली के औद्योगिक और घरेलू बिलों में फिक्स चार्ज लगाए जा रहे हैं, ऐसे में अतिरिक्त अधिभार का कोई औचित्य नहीं है।
व्यापारियों ने बताया कि वाणिज्यिक (एलएमवी-2) उपभोक्ताओं से फिक्स चार्ज और मिनिमम चार्ज दोनों वसूले जा रहे हैं, जबकि घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर 7.5% इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी भी लागू है।
उन्होंने कहा कि नियामक आयोग हर वर्ष बिजली उत्पादन लागत और खर्चों की समीक्षा कर जनसुनवाई के बाद दरें तय करता है, ऐसे में बीच सत्र में अचानक वृद्धि करना अनुचित है। इससे न केवल एक गलत परंपरा की शुरुआत होगी बल्कि महंगाई भी बढ़ेगी और आम जनता प्रभावित होगी।
व्यापारियों ने चेतावनी दी कि इस प्रकार की वृद्धि से प्रदेश का उद्योग और व्यापार प्रभावित होगा तथा लागत बढ़ने से छोटे व्यापारियों का अस्तित्व संकट में आ सकता है।
उन्होंने मांग की कि बिजली बिलों में लगाए गए 10% ईंधन अधिभार को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।
इस अवसर पर अशोक कुमार जाटव, सरदार मनदीप सिंह, हाजी अब्दुल मन्नान मंसूरी, भारतेन्द्र नाथ भारद्वाज, हाजी शहंशाह वारसी, राहुल दीक्षित, सुनील कुशवाहा, मंजू लता द्विवेदी, शकीला बेगम, रियाज अब्बासी, सोनू अग्रवाल, अजीत कुमार, धर्मेन्द्र यादव, सिकंदर वारसी, आफताब खान, हामिद, इश्तायक कुरैशी, परिमित दीक्षित सहित अनेक व्यापारी उपस्थित
