
करंट विज़न संवाददाता
इमरान खान
इटावा।नारायन काॅलेज आफ साइंस एण्ड आर्ट्स, इटावा के विशाल प्रांगण में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में मुख्य अतिथि डिस्ट्रिक्ट फाॅरेस्ट आफिसर विकास नायक,विद्यालय के प्रधानाचार्य डाॅ.धर्मेन्द्र शर्मा,सम्मानित अतिथि पर्यावरणविद डा.राजीव चौहान,क्षेत्रीय वनाधिकारी अशोक कुमार शर्मा,डी.पी. ओ.नमामि गंगे संजीव चौहान तथा शोध अधिकारी श्रीमती संगीता ने पौधा रोपण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।इस अवसर पर विद्यालय के अध्यापक/अध्यापिकाओं ने भी पौधा रोपण कर विद्यालय कैम्पस को और ज्यादा हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि डीएफओ विकास नायक ने कहा कि सभी विद्यार्थियों को अपने परिवार में सदस्यों की संख्या के अनुसार पौधा रोपण करना चाहिए।पौधा रोपण मुहिम का उद्देश्य वातावरण को शुद्ध करना तथा संरक्षित करना है।आप सभी छात्र- छात्राओं को न सिर्फ पौधा लगाना है अपितु उसकी देखभाल तब तक करनी जब तक पौधा वृक्ष न बन जाए,आने वाली पीढ़ी के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि जलवायु परिवर्तन को सकारात्मक बनाया जाए जिसके द्वारा समाज को तथा सम्पूर्ण संसार को लाभ मिले।*
विद्यालय के प्रधानाचार्य डाॅ.धर्मेन्द्र शर्मा ने छात्र- छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि वृक्ष मानव जीवन का आधार हैं।भारत सरकार के ’एक पेड़ मां के नाम अभियान में’ सभी को बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिये,पेड़ हमारे जीवन का आधार है।उन्होंने कहा कि वर्तमान में मनुष्य तेजी से पेड़ों की कटाई कर रहा है, जिससे जंगल का क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है जो कि बेहद चिंता का विषय है।वृ़क्ष हमें न सिर्फ आक्सीजन देते हैं बल्कि रोजमर्रा की जिन्दगी में वृक्ष मनुष्य की जिन्दगी में सहायक हैं।शास्त्रों में भी कहा गया है कि एक वृक्ष सौ पुत्र के समान होता है।अतः हम सबको अधिकाधिक वृक्षारोपण में सहयोग करना चाहिए।*
पर्यावरणविद डा.राजीव चौहान ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिये अपने घर में कम से कम एक वृक्ष और छोटे-छोटे पौधे अवश्य लगायें और दूसरों को भी पौधे लगाने के लिये प्रेरित करें।उन्होंने कहा कि वृ़क्ष ही जलवायु को जीवन के प्रति अनुकूल बनाते हैं तथा वातावरण को शुद्ध रखते हैं।इसलिये वृक्षारोपण करना हम सभी का परम कर्तव्य है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय काॅर्डिनेटर उरूसा रिज़वान,सी.सी.ए. इंचार्ज ऋतु कनौजिया,टोनी साइमन मोहन दलेला,सीमा मिश्रा एवं रूपेश कुमार आदि अध्यापक/अध्यापिकाओं का विशेष योगदान रहा।*
