हिन्दी पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा – गुफरान अहमद
इस्लामिया इण्टर कालेज में हिन्दी दिवस समारोह मनाया गया
करंट विज़न संवाददाता
इटावा। एच एम एस इस्लामिया इण्टर कॉलेज के सभागार में हिन्दी दिवस समारोह के मुख्य अतिथि सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र बहादुर ने कहा कि देश को जोड़ने की क्षमता केवल हिन्दी में है।उन्होंने कहा कि उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक हिन्दी समझी जाती है वह भारतीय भाषाओं की सेतु का काम करती है। उन्होंने इस बात पर पीड़ा जताई कि हमारे बच्चे उन्यासी को सेविंटी नाइन से समझते हैं।इस स्थिति को बदलने के लिए कार्य करना होगा। विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग की सदस्य डॉ सीमा शाक्य ने कहा कि हिन्दी संस्कारों की भाषा है। हमे अपने बच्चों को व्यवहारिक जीवन में हिंदी से निरंतर जोड़े रखने के लिए प्रयत्न करना चाहिए। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार डॉ पदम सिंह यादव ने कहा कि हिन्दी को बढ़ावा लोगों के प्रयास से ही मिला है। समीक्षक साहित्य मनीषी डॉ रमाकांत राय ने कहा कि आज हिंदी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य भाषा है।नयुवा कवि रोहित चौधरी ने अपनी कविताओं से समां बांध दिया। प्रधानाचार्य गुफरान अहमद ने कहा कि इस्लामिया कॉलेज प्रति वर्ष हिंदी दिवस पर साहित्य मनीषियों को बुलाकर अपने बच्चों को लाभान्वित करता है। हिन्दी पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राविधिक स्वयं सेवक वाचस्पति द्विवेदी, आनंद कुमार और अक्षरा तथा सेवा निवृत्त बैंक प्रबंधक प्रतिमा शंकर दीक्षित ने भी हिंदी को भारत की आत्मा बताया। कॉलेज प्रबंध समिति की सदस्य गौसिया फातिमा ने आभार प्रदर्शन में कहा कि हिन्दी सभी भारतीय भाषाओं के विकास की पक्षधर है, हिन्दी को सभी भारतीय भाषाएं प्रिय हैं। अतिथियों का स्वागत मुहम्मद अतीक, मुहम्मद जावेद खां, फरदीन खान, डॉ अरशद मलिक, मैराज अहमद, समीउद्दीन जुबैरी, उमैर आदिल, हुदा अलवी, फैज़ान वारिस वारसी आदि ने किया। संचालन हिन्दी प्रवक्ता डॉ कुश चतुर्वेदी ने किया। इस्लामिया इण्टर कॉलेज के बच्चों ने साहित्यकार चित्र प्रदर्शनी भी लगाई। सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र बहादुर ने बच्चों की शानदार प्रस्तुति की प्रशंसा की। प्रदर्शनी में आदिकाल से आधुनिक काल तक के कवियों,साहित्यकारों के चित्र और वाक्य, कविताएं सलीके से लगाई गई। हिंदी दिवस समारोह में बोलते प्रधानाचार्य गुफरान अहमद।
