रसूल अल्लाह और इमाम हसन के ताबूत की जियारत बरामद हुई
करंट विज़न संवाददाता
इटावा। रसूल अल्लाह और इमाम हसन की शहादत पर पक्की सराये स्थित बड़े इमामबाड़े में मौलाना अनवारुल हसन ज़ैदी इमामे जुमा इटावा की ओर से मजलिस का आयोजन किया गया जिसमें रसूल और इमाम के ताबूत की जियारत बरामद की गई। मजलिस में तक़रीर करते हुए मौलाना अबूजर अब्बास खान इमामे जुमा शिकोहाबाद जनपद फीरोजाबाद ने कहा कायनात में अल्लाह के बाद रसूल से बड़ा मर्तबा किसी का नहीं है, लेकिन जब इमाम हसन व हुसैन ने रसूल से नाके के लिए जिद की तो रसूल ने अपने नवासों के लिए नाका बनकर साबित कर दिया कि वह अपने नवासों से कितनी मोहब्बत करते हैं। अल्लाह ने कुरान में रसूल की शान में कई जगह कसीदे पढ़े और तारीफ की। अल्लाह ने रसूल की पैदाइश और शहादत में इमामत को साथ रखकर बता दिया कि रिसालत और इमामत में कोई फर्क नहीं है। ग़दीर में मौला अली की विलायत का एलान भी सुन्नते रसूल है। उन्होंने कहा कि रसूल के नवासे इमाम हसन को जहर देकर शहीद किया गया और उनके जनाजे पर तीरों की बारिश की गई।।मजलिस में सलीम रज़ा, जहूर नक़वी, सफीर हैदर ने सोजख्वानी, तनवीर हसन व तसलीम रज़ा ने नोहा ख्वानी की। मजलिस के दौरान कम्बर रज़ा, जाफ़र रज़ा, सगीर रज़ा, शावेज़ नक़वी रसूल अल्लाह और इमाम हसन के ताबूत को मातमी नोहाख्वानी के साथ इमामबाड़े में लेकर आये जहां लोगों ने ताबूत की जियारत की। मजलिस के बाद महिलाओं ने भी नोहाख्वानी कर ताबूत की जियारत की। इसी क्रम में स्व. वसी रज़ा द्वारा स्थापित मजलिस का आयोजन असद रज़ा, शाहिद रज़ा की ओर से इमामबारगाह घटिया अज़मत अली पर किया गया जिसमें मौलाना अनवारुल हसन ज़ैदी ने तक़रीर की। मजलिस में तक़रीर करते मौलाना अबूजर अब्बास खान।
