बैठक में निर्देश देते जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल
करंट विज़न संवाददाता
इटावा। जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम एवं प्रभावी पराली प्रबंधन के संबंध में बैठक आयोजित हुई, बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए आधे-अधूरे मन से नहीं, बल्कि पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। सर्वोच्च न्यायालय एवं शासन स्तर से इस संबंध में जारी निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि विगत वर्षों में जनपद में पराली जलाने की घटनाएं चिंताजनक रही हैं। वर्ष 2023 में 130, वर्ष 2024 में 122 तथा वर्ष 2025 में 164 घटनाएं दर्ज की गईं। उन्होंने निर्देश दिए कि धान उत्पादक क्षेत्रों में विशेष रूप से सायंकालीन गोष्ठियां आयोजित कर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान तथा उसके उचित प्रबंधन के विकल्पों के बारे में जागरूक किया जाए। जिन क्षेत्रों में पूर्व में अधिक घटनाएं हुई हैं, वहां विशेष अभियान चलाकर संबंधित किसानों के साथ सायंकाल गोष्ठी की जाए और पराली न जलाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ग्राम स्तर पर निगरानी के साथ जागरूकता एवं प्रवर्तन की कार्रवाई आवश्यक है। सभी खंड विकास अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति की समीक्षा करें तथा यह सुनिश्चित करें कि किसानों को फसल अवशेषों के निस्तारण के लिए उचित विकल्प उपलब्ध हों। बाहर से आने वाले कंबाइन हार्वेस्टरों की भी जांच की जाए। जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि धान की कटाई सुपर एसएमएस युक्त कंबाइन हार्वेस्टर से कराएं तथा फसल अवशेषों को खेतों में जलाने के बजाय निर्धारित वैकल्पिक विधियों से निस्तारित करें। किसान अपनी पराली निकटतम गौशाला में भी पहुंचा सकते हैं। इसके परिवहन का व्यय मनरेगा अथवा वित्त आयोग से उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार वहन किए जाने की व्यवस्था की जानकारी भी किसानों को दी जाए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, उप कृषि निदेशक सतीश कुमार पांडेय, जिला विकास अधिकारी राकेश प्रसाद, जिला कृषि अधिकारी ओंकार सिंह सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
