शिक्षक रामजन्म ने की साहित्य को किताबों से निकालकर बच्चों के सामने जीवंत करने की पहल

शिक्षक रामजन्म सिंह को सम्मानित करते मुख्य अतिथि

करंट विज़न संवाददाता

इटावा। साहित्य को कक्षा की किताबों से निकालकर बच्चों के सामने जीवंत करने की पहल में जनपद के शिक्षक एवं स्टेट रिसोर्स ग्रुप के सदस्य राम जनम सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कथा सम्राट प्रेमचंद की चर्चित कहानी ‘पंच परमेश्वर’ को फिल्म का रूप देकर विद्यार्थियों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। राज्य हिंदी संस्थान के लिए निर्मित एवं निर्देशित इस फिल्म का प्रथम प्रदर्शन प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही में हुआ। राम जनम सिंह के निर्देशन में बनी यह फिल्म उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में कक्षा पांच की पुस्तक ‘वाटिका’ में शामिल ‘पंच परमेश्वर’ कहानी पर आधारित है। उनका उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित न रखकर कहानी के पात्रों, घटनाओं और भावनाओं को दृश्य-श्रव्य माध्यम के जरिए सहज एवं प्रभावी ढंग से समझाना है। इस रचनात्मक पहल के लिए प्रेमचंद शोध संस्थान, वाराणसी में राम जनम सिंह को सम्मानित किया गया। संयुक्त शिक्षा निदेशक वाराणसी मंडल दिनेश सिंह तथा राज्य हिंदी संस्थान की निदेशक चंदना राम इकबाल यादव ने उन्हें सम्मान प्रदान किया। राम जनम सिंह ने इस परियोजना में केवल निर्देशन ही नहीं किया, बल्कि विद्यालयी बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कहानी को फिल्म के रूप में प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी निभाई। फिल्म की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों को ही कलाकार के रूप में चुना गया। इससे शिक्षा और अभिनय के बीच एक अनूठा सेतु तैयार हुआ। फिल्म में अभिनय करने वाले शिक्षक अनुपम कौशल, संजीव यादव, सुनील चतुर्वेदी, वीनस सिंह एवं वंदना को भी समारोह में सम्मानित किया गया। प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही में उनकी कहानी पर बनी फिल्म की पहली स्क्रीनिंग होना इस परियोजना का विशेष आकर्षण रहा। समारोह में प्रेमचंद शोध संस्थान के समन्वयक नीरज खरे, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. विवेक सिंह एवं डॉ. मुशर्रफ अली, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर धनंजय चोपड़ा तथा राज्य हिंदी संस्थान के प्रदीप जायसवाल सहित उपस्थित लोगों ने फिल्म और राम जनम सिंह के प्रयास की सराहना की। राम जनम सिंह ने कहा, “प्रेमचंद की जन्मस्थली पर उन्हीं की कहानी पर मेरे द्वारा बनाई गई फिल्म की पहली स्क्रीनिंग होना और उसका साक्षी बनना मेरे लिए ऐतिहासिक क्षण है।

 

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