शिक्षक भर्ती प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में 6170 पदों पर जंग अंतिम दौर में

सरकार भरने को तैयार, 2 नवंबर को आ सकता है फैसला

करंट विज़न संवाददाता

​इटावा। वर्ष 2011 की बहुचर्चित 72,825 प्राथमिक शिक्षक भर्ती में अवशेष 6,170 पदों पर नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही अवमानना याचिका की विधिक लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
बीएड एसोसिएशन इटावा के जिलाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने इस मामले की पूरी विधिक स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि आगामी 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में अंतिम व ऐतिहासिक फैसला आने की प्रबल संभावना है। ​जिलाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने अवमानना याचिका की पृष्ठभूमि विस्तार से समझाते हुए बताया कि 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने इस भर्ती का अंतिम फैसला सुनाया था। उस आदेश के पैरा संख्या 15, 16, 17, 18 व 19 के तहत शेष बचे 6,170 पदों को भरने के लिए सरकार को निर्देश व छूट दी गई थी। किंतु शासन द्वारा अंतिम आदेश के इन महत्वपूर्ण पैराग्राफ्स का अनुपालन नहीं किया गया जिसके चलते यह अवमानना का सीधा मामला बना और अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। अंतिम आदेश से पूर्व मामले में कई अंतरिम आदेश आए थे, जिनमें अभ्यर्थियों को कंसीडर करने के निर्देश दिए गए थे। अंतिम आदेश आने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने अंतरिम आदेशों के आधार पर तो कुछ ने 25 जुलाई 2017 के अंतिम आदेश के उल्लंघन को लेकर अवमानना याचिकाएं दाखिल की थीं। ​पहले यह मामला माननीय न्यायमूर्ति संजय करोल की खंडपीठ में विचाराधीन था, जहां न्यायालय शेष अभ्यर्थियों को राहत दिलाने के पक्ष में था, किंतु सरकार द्वारा सभी को समायोजित करने में असमर्थता जताए जाने के बाद मामला माननीय न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ को स्थानांतरित कर दिया गया। ​न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने मामले की जटिलता को देखते हुए याचिकाओं को कुल 7 श्रेणियों में वर्गीकृत किया। इसमें अंतरिम आदेशों के आधार पर दाखिल लगभग 150 से 200 याचिकाओं को 23 सितंबर को यह स्पष्ट करते हुए खारिज कर दिया गया कि अंतिम आदेश पारित होने के बाद अंतरिम आदेश स्वतः निष्प्रभावी हो जाते हैं। ​उदय प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि अंतरिम आदेश वाली रिटें खारिज होने के बाद अब केवल 25 जुलाई 2017 के अंतिम आदेश के आधार पर दाखिल अवमानना याचिकाएं ही विचारणीय बची हैं। इसके चलते दावेदारों की संख्या, जो पहले 30 से 32 हजार तक पहुंच रही थी, अब घटकर मात्र 7 से 8 हजार के करीब रह गई है। सबसे अहम बात यह है कि सरकार ने भी अपने जवाब में 6,170 रिक्त पदों को भरने की सहमति दे दी है और न्यायालय भी इन्हीं पदों पर नियुक्ति देने के पक्ष में है। सीमित दावेदारों और 6,170 रिक्त पदों की उपलब्धता के कारण वर्षों से संघर्ष कर रहे अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने के पूर्ण आसार बन गए हैं। ​इस दौरान जिलाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह के साथ प्रमुख रूप से आलोक कुमार,देवेश कुमार, इरफान अहमद, राशिद, धर्मवीर सिंह, रीना यादव,गौरी यादव ,अवध नरेश, नरेंद्र कुमार सहित संगठन के कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। बीएड एसोसिएशन इटावा के जिलाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह व अन्य।

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