करंट विजन संवाददाता
फफूंद (औरैया), 26 जनवरी 2026 जहाँ आज पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है वहीं ऐतिहासिक कस्बा फफूंद उन महान आत्माओं के बलिदान को याद कर रहा है जिन्होंने मुल्क की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। यह पावन भूमि रूहानियत और देशभक्ति के संगम की गवाह है विशेषकर यहाँ की प्रतिष्ठित खानकाह आस्ताना आलिया समदिया मिसबाहिया के आबा ओ आज़ादाद ने हिन्दुस्तान की जंग में हिस्सा लेकर मुल्क की आजादी के लिए अपनी जान का नजराना भी पेश किया ।
इतिहास गवाह है कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब अंग्रेजों ने बदायूं शरीफ और आसपास के इलाकों पर कब्जा किया तब मुहल्ला मुहीउद्दीन पुर के निवासी अश्शेख फिलकोनेन हजरत सैय्यद ग़ालिब हुसैन रजियाल्लाहु अन्हू ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका। हुजूर क़िब्ल ए आलम हुजूर हाफिज ए बुखारी सैय्यद अब्दुस्समद चिश्ती रजियल्लाहु अन्हु (अलमारुफ ख्वाजा बेकस नवाज) के वालिद माजिद (पिता) हजरत सैय्यद ग़ालिब हुसैन को मुखबिरों की शिकायत पर गिरफ्तार कर लिया गया था। अपने प्यारे वतन हिंदुस्तान से मुहब्बत करने के “जुर्म” में उन पर हुकूमत से गद्दारी का मुकद्दमा चला । अफसर फौज के यहां सरसरी तौर पर समाअत के बाद सबके मुकदमे का फैसला सुना दिया गया जिसमें चंद को बरी कर दिया गया बकिया को सजाए मौत सुना दी गई । सजाए मौत का हुक्म सुनाने के बाद सबको एक लाइन में खड़ा करके गोली मार देने का हुक्म हुआ तो सिवाए हुजूर सैय्यद ग़ालिब हुसैन रजियाल्लाहु अन्हू के बकिया सब पहली गोली मारने पर खत्म हो गए ।लेकिन हुजूर सैय्यद ग़ालिब हुसैन रजियाल्लाहु अन्हू को दो गोली और मारी गई । तीसरी गोली पर हुजूर सैय्यद ग़ालिब हुसैन रजियाल्लाहु अन्हू ने अंग्रेज अफसर से कहा कि मैंने अल्लाह तआला की बारगाह में दुआ की है कि मुझे तलवार की मौत नसीब फरमा । लिहाजा बजाए इन हिन्दुस्तानियों के तू खुद अगर तलवार से कत्ल करेगा तो मुझे शहादत की मौत नसीब होगी वरना मेरी मौत नहीं आएगी । फिर ऐसा ही हुआ कि उस अफसर ने तलवार लेकर अपने हाथ से कत्ल किया ।आपके एक करीबी रिश्तेदार सैय्यद अब्बास अली साहब मरहूम का यह भी बयान है कि उस अंग्रेज अफसर ने सब को गोली मारने से पहले पानी पिलवाया था लेकिन हुजूर सैय्यद ग़ालिब हुसैन रजियाल्लाहु अन्हू ने उससे कहा कि मैं अब इस दुनिया का पानी नहीं पियूंगा और उन्होंने एक कतरा भी पानी नहीं पिया इसी हालत में आपको तलवार से कत्ल कर दिया गया । हुजूर सैय्यद ग़ालिब हुसैन रजियाल्लाहु अन्हू की शहादत अंग्रेजी फौज और हुकूमत के हाथों हुई इसके बाद आपका मकान और जमीन जायदाद जो कई देहात में थी अंग्रेज सरकार ने जब्त कर ली यहां तक कि रहने के लिए मकान तक नहीं बचा । आपकी बेवा ने अपने बेटे ख्वाजा अब्दुस्समद चिश्ती रजियल्लाहु अन्हु जिनकी उम्र उस वक्त 5 साल से भी कम थी को एक छोटी घास फूस की झोपडी डाल कर बाकी जिंदगी गुजारी और चर्खा से सूत कात कर अपने बच्चे की मुश्किल से परवरिश फरमाई । यह है हाफिज ए बुखारी के वालिद माजिद का अपने मुल्क की आजादी के लिए शानदार कारनामा कि उन्होंने मुल्क के लिए अपनी जान की कुर्बानी पेश कर दी । यही हाफिज ए बुखारी वह हैं जो फफूंद शरीफ में आराम फरमा हैं और जिनके दर से अहले कस्बा और मुल्क की आवाम रात दिन फ़ैजियाब हो रहे हैं । इस तरह यह बात भी वाज़ेह हो गई कि सादाते फफूंद शरीफ के आबा ओ आज़ादाद ने हिन्दुस्तान की आजादी की जंग में हिस्सा लेकर मुल्क की आजादी के लिए अपनी जान का नजराना भी पेश किया है ।
आज गणतंत्र दिवस के मौके पर फफूंद के नागरिक गर्व के साथ इस महान बलिदान को याद कर रहे हैं। आस्ताना आलिया समदिया मिसबाहिया खानकाह से जुड़ी यह दास्तान क्षेत्र की गंगा-जमुनी तहजीब और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है। आज 26 जनवरी पर स्थानीय विद्यालयों और सरकारी संस्थानों के साथ-साथ आस्ताना आलिया समदिया मिसबाहिया खानकाह परिसर में तिरंगा फहराकर शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की गई ।
शहीद-ए-वतन हजरत सैय्यद ग़ालिब हुसैन को गणतंत्र दिवस पर सलाम
