सायबर ठगों के बारे में जानकारी देते एसएसपी
करंट विज़न संवाददाता
इटावा। एसओजी, सर्विलांस टीम एवं थाना सिविल लाइन पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग एवं सट्टेबाजी के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले अन्तर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर चार अन्तर्राज्यीय साइबर गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया। एसओजी, सर्विलांस टीम एवं थाना सिविल लाइन पुलिस टीम थाना सिविल लाइन क्षेत्रान्तर्गत संयुक्त रुप से संदिग्ध व्यक्ति, वाहनों की चेकिंग कर रही थी तभी मुखबिर द्वारा सूचना प्राप्त हुयी कि ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से जनता के लोगों को लालच देकर उनसे ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य अंबेडकर चौराहा ओवरब्रिज के नीचे गाडियों में बैठे हैं। सूचना पर तत्काल पुलिस टीमों ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी कर चार शातिर आरोपियों अंशुल उर्फ अंशू तिवारी पुत्र लालेन्द्र उर्फ लालु तिवारी निवासी ग्राम श्रीनगर बलोय लवेदी हाल पता मानिकपुर मोड़ इकदिल, रॉकी राणावत पुत्र राकेश बाबू निवासी किल्ली रोड बसरेहर, अंकित मिश्रा उर्फ राहुल पुत्र सत्य नारायण मिश्रा निवासी विकास कॉलोनी इकदिल मूल निवासी दिवूनपुर किशनी जनपद मैनपुरी, मोहित उर्फ रोहित यादव पुत्र ओम प्रकाश यादव निवासी ग्राम रूपपुर थाना अछल्दा जनपद औरैया को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गये आरोपियों से पुलिस टीम ने 16 मोबाइल फोन, 42 एटीएम/डेबिट कार्ड, 6 सिम कार्ड, लैपटॉप, विभिन्न बैंक खातों की पासबुक, चेकबुक एवं पहचान पत्र सम्बन्धी दस्तावेज, 3 रजिस्टर (लेन-देन का विवरण), थार एवं स्कॉर्पियो गाड़ी ठगी की रकम से खरीदी गई बरामद हुयी। एसएसपी ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गिरोह के जुड़े अन्य सदस्यों के नाम प्रकाश में आए हैं जो अलग-अलग टीमें बनाकर म्यूल बैंक खाते खुलवाने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने तथा ऑनलाइन गेमिंग एवं सट्टेबाजी के माध्यम से साइबर ठगी के नेटवर्क को संचालित करने में संलिप्त बताए गए हैं जिनकी गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीमें प्रयासरत हैं। पकड़े गये अभियुक्तों से कड़ाई से पूछताछ की गयी तो उनके द्वारा बताया गया कि हम लोग ऑनलाइन गेमिंग ऐप के माध्यम से लोगों को गेम खिलाने एवं हार-जीत पर दांव लगवाने के नाम पर धनराशि प्राप्त करते थे तथा आम लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके फोटो, पहचान पत्र एवं आधार संबंधी दस्तावेज प्राप्त कर उनके नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराते हैं तथा फर्जी बैंक खाते खुलवाकर उनके एटीएम कार्ड प्राप्त करते हैं । इसके अतिरिक्त, संबंधित व्यक्तियों के नाम पर सिम कार्ड लेकर उन्हें बैंक खातों से लिंक कराया जाता है। इन बैंक खातों का उपयोग ऑनलाइन गेमिंग एवं सट्टेबाजी के नाम पर की जाने वाली ठगी की धनराशि प्राप्त करने के लिए किया जाता है । इसके बाद खातों में प्राप्त धनराशि को निकालकर अथवा अन्य खातों में स्थानांतरित कर गिरोह के सदस्यों के बीच वितरित किया जाता है तथा इसी धनराशि से वाहन आदि सम्पत्तियां खरीदी जाती थीं। उक्त सराहनीय कार्य करने वाली पुलिस टीमों के उत्साहवर्धन हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा 20 हजार रुपये की राशि से पुरस्कृत किय गया।
