में गरीब बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर
करंट विज़न संवाददाता
इटावा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इटावा के बेसिक शिक्षा विभाग को बेहतर शिक्षा हेतु करोड़ों रुपये का बजट दिये जाने के बाद भी जनपद के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के दावों के बीच बच्चों को इन स्कूलों में बच्चों को बैठने की बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। शिक्षा विभाग द्वारा बड़े-बड़े दावों के बीच न तो कुर्सी और न मेजों की व्यवस्था की गई। जिले के परिषदीय विद्यालयों के गरीब बच्चे टाट-पट्टी पर सीधे जमीन पर बैठकर अपने भविष्य की इबारत गढ़ रहे हैं। अगले माह नवम्बर से सर्दी का मौसम शुरु होने वाला है लेकिन आज तक इन विद्यालयों में व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो सकी। पिछले वर्ष इटावा कई बार प्रदेश के सबसे ठंडे जिलों में शामिल होने के कारण सैकड़ों बच्चे सर्दी खा जाने से बीमार हो गये थे। ऐसे में यहां फर्नीचर के अभाव में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की मुश्किलें सर्दी में बढ़ सकती हैं। जिलें में करीब 1236 प्राथमिक विद्यालय है। इनमें 855 विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध हैं जबकि 381 विद्यालयों में बच्चों के बैठने का उचित इंतजाम ही नहीं है। इसी तरह 248 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से 50 स्कूलों में फर्नीचर नहीं है। इस तरह प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को मिलाकर कुल 431 स्कूलों में गरीब बच्चे जमीन पर बैठकर अपने भविष्य बनाने के लिए बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जानकारी मिली है कि इन स्कूलों में बच्चों को मिड-डे-मील भोजन, सर्दी के कपड़े भी उपलब्ध नहीं होते। इन विद्यालय में गरीबों के ही बच्चे पढ़ते हैं क्योंकि अमीर घरानों के बच्चे तो कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं। जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते गरीब बच्चे।
