एफआईआर में दो अधिवक्ताओं के नाम सामने आने के बाद अधिवक्ताओं में आक्रोश फैल गया और पुलिस व वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली
करंट विज़न संवाददाता
फतेहपुर। सदर कोतवाली क्षेत्र के चौफेरवा गांव में हुए चर्चित ट्रिपल डेथ केस को लेकर कचहरी परिसर में उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब पुलिस नामजद आरोपियों को रिमांड पर लेकर सीजेएम कोर्ट में पेश करने पहुंची। एफआईआर में दो अधिवक्ताओं के नाम सामने आने के बाद अधिवक्ताओं में आक्रोश फैल गया और पुलिस व वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कचहरी परिसर में संभावित हंगामे को देखते हुए पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई और कुछ समय के लिए धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बन गई। हालांकि बाद में अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इसके बाद अधिवक्ता दिलीप त्रिवेदी, संजय सिंह सहित अन्य आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामले को लेकर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गया प्रसाद दुबे ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुसाइड नोट की जांच किए बिना उसे प्रमाणिक मानना उचित नहीं है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।गौरतलब है कि चौफेरवा गांव में एक बंद मकान के अंदर सुशीला देवी, उनके पुत्र अमर श्रीवास्तव और देवर सुनील श्रीवास्तव के रक्तरंजित शव मिले थे। शुरुआती जांच में पुलिस को मौके से एक कथित सुसाइड नोट मिला, जिसमें कुछ लोगों पर मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने इसी आधार पर पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
