77वें गणतंत्र दिवस के विशिष्ट अतिथि किसानों से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया संवाद

किसान भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और कृषि उसकी आत्मा- शिवराज सिंह

भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ा, किसानों को निर्यात से मिल रहे बेहतर दाम- शिवराज सिंह चौहान

दालों की पूरी खरीद और 30% आयात शुल्क से किसानों के हितों की रक्षा- शिवराज सिंह

‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत 52 वैज्ञानिक टीमों से किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन- शिवराज सिंह चौहान

फार्मर आईडी, कड़े पेस्टीसाइड एक्ट और सीड बिल के माध्यम से कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी- शिवराज सिंह चौहान

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नई दिल्ली, 26 जनवरी 2026, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत लोकतंत्र की जननी है और कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जबकि किसान उसकी आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत की बढ़ती शक्ति और सामर्थ्य को पूरा विश्व देख रहा है और देश अब आंखों में आंखें डालकर बात करने की स्थिति में है। श्री चौहान ने यह बात 77वें गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल देश के विभिन्न हिस्सों से आए किसान भाई-बहनों से संवाद के दौरान कही।पूसा, नई दिल्ली परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी और श्री रामनाथ ठाकुर भी उपस्थित रहे, वहीं केंद्रीय कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट सहित वरिष्ठ अधिकारी भी शमिल हुए। कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य करने वाली हरियाणा की किसान श्रीमती अनीता कुमारी, मध्य प्रदेश के किसान श्री राजेश पाल और बिहार के किसान श्री गणेश कुमार गुप्ता ने किसानों की समस्याएं और सुझाव केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखे तथा अपने अनुभव साझा किए।इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने किसानों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस वर्ष तीन किसानों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो देश के किसानों के सम्मान और योगदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री के रूप में किसानों की सेवा उनके लिए भगवान की पूजा के समान है।कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सरकार ने किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उत्पादन बढ़ाने से लेकर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने तक निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब सरकार दालों की पूरी खरीद कर रही है, साथ ही बाहर से आयात होने वाली दालों पर 30 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया गया है, ताकि भारतीय किसानों को दालों का उचित मूल्य मिल सके।श्री चौहान ने कहा कि भारत आज विश्व में चावल उत्पादन में प्रथम स्थान पर है और चीन को पछाड़ चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि चावल के निर्यात पर लगने वाली मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस (एमईपी) की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, ताकि किसान अपने चावल को सुगमता से निर्यात कर सकें और बेहतर दाम प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि इस निर्णय के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और इस बार किसानों को चावल के अच्छे दाम मिल रहे हैं।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ को फिर से शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत आईसीएआर द्वारा 52 टीमों का गठन किया गया है, जिनका उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराकर उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि इन टीमों के माध्यम से गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद, तकनीकी मार्गदर्शन और उनकी समस्याओं के समाधान का कार्य किया जाएगा।श्री चौहान ने कहा कि किसानों के लिए ‘फार्मर आईडी’ बनाने का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे योजनाओं से संबंधित कागजी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सके और किसानों को समय पर लाभ पहुंचाया जा सके। उन्होंने बताया कि सरकार संसद के आगामी सत्र में पेस्टीसाइड एक्ट और सीड बिल लाने जा रही है, जिनमें दंडात्मक प्रावधानों को और कठोर किया जाएगा तथा 30 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा।केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार इंटीग्रेटेड फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और प्राकृतिक व जैविक खेती को प्रोत्साहन दे रही है। उनका कहना था कि छोटी जोत की खेती को भी लाभकारी बनाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है और “खेती को फायदे का पेशा बनाकर ही छोड़ा जाएगा।”इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय किसानों की अभूतपूर्व प्रगति हो रही है। वहीं, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विश्वास’ के मंत्र को संकल्प मानते हुए कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं और किसानों को संपन्न व खुशहाल बनाकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

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