माहे रमज़ान गरीबों की मदद का बेहतरीन महीना, मौलाना इरफान चिश्ती

करंट विजन संवाददाता

इमरान खान

इटावा।रमज़ान शरीफ का महीना अपने साथ बहुत सारी खुशियां लेकर आता है मोहल्ला शाह महमूद क़िले वाली मस्जिद जुमा की नमाज़ मै मौलाना मुहम्मद इरफान चिश्ती साहब ने कहा माहे रमज़ान सब्र शुक्र सम्मान भाईचारा हमदर्दी इबादत और गरीबों की मदद का पैगाम देता है मज़हबे इस्लाम के पांच अरकान हैं जिसमें एक अरकान ज़कात है अगर किसी मुसलमान के पास साढ़े 7 तोला सोना या साढ़े 52 तोला चांदी होती है या उसके बराबर रक़म होती है तो वह साहिबे निसाब होता है उसके ऊपर ज़कात फर्ज़ होती है और उसको अपने इस माल में से ढाई परसेंट जैसे एक लाख में ढाई हजार रुपए ज़कात के निकालने पड़ते हैं इस रक़म पर गरीब रिश्तेदार गरीब पड़ोसी फक़ीर यतीम मिस्कीन मुसाफिर कर्ज़दार और जो अल्लाह के रास्ते में हो सिर्फ उनका हक़ है और मौलाना इरफान चिश्ती साहब ने कहा जो मुसलमान अपने माल की पूरी ज़कात अदा करता है अल्लाह पाक उसको जन्नतुल फिरदौस में जगह अता फरमाता है पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया सदका ख़ैरात ज़कात अदा करने से माल कम नहीं होता बल्कि और ज़्यादा बढ़ जाता है ज़कात वैसे तो पूरी साल में कभी भी निकाल सकते हैं लेकिन रमज़ान उल मुबारक में सवाब सत्तर गुना ज़्यादा होता है इस वजह से मुसलमान रमज़ान शरीफ में ज़कात अदा करते हैं ज़कात के दो फायदे हैं एक फायदा तो यह है कि इंसान के दिल से माल व दौलत का लालच कम होता है और दूसरा गरीबों का फायदा होता है ज़कात की रक़म शुरुआती रमज़ान में अदा कर दें जिससे वह अपनी ज़रूरत व ईद की तैयारी पूरी कर लें ओर खुशियों के साथ वह अपना त्यौहार मनाए ।

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