बेहड़ वाले सैयद बाबा का मजार आठ सौ वर्ष पुराना, उर्स की अनुमति दी जाए

मुस्लिम समाज ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को दिया

इटावा। प्राचीन बेहड़ वाले सैयद बाबा मजार के संरक्षण, वन विभाग की कार्यवाही पर रोक एवं वर्ष 2005 से निरंतर हो रहे उर्स के आयोजन की अनुमति देने की मांग को लेकर मो. गुलशेर व मो. इमरान की अगुवाई में मुस्लिम समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया। ज्ञापन में कहा गया है कि बेहड़ वाले सय्यद बाबा के नाम से विख्यात यह मजार शरीफ लगभग 800 वर्ष पुरानी है। ‘द प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 की धारा 3 एवं 4 के अंतर्गत 15 अगस्त 1947 से पूर्व अस्तित्व में रहे किसी भी धार्मिक स्थल की स्थिति या स्वरूप को बदला जाना कानूनन वर्जित और दंडनीय है। इस पवित्र दरगाह पर वर्ष 2005 से लेकर अब तक जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा उर्स के आयोजन हेतु निरंतर आधिकारिक अनुमतियां और रसीदें जारी की जाती रही हैं। वक्फ रजिस्टर में औपचारिक पंजीकरण न होना इसकी धार्मिक प्रकृति को शून्य नहीं करता। 20 वर्षों का उर्स रिकॉर्ड इस लंबे उपयोग’ का सबसे सशक्त विधिक प्रमाण है। उक्त मजार कानूनत एक वक्फ संपत्ति है जिसका पंजीकरण ‘उम्मीद’ पोर्टल पर प्रक्रियाधीन है। वक्फ एक्ट की धाराओं के अनुसार,ल वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन एक विशेष कानूनी प्रक्रिया के अधीन है जिसे वन विभाग दरकिनार नहीं कर सकता। जब स्वयं प्रशासन 20 वर्षों से वहां धार्मिक कृत्यों और उर्स की आधिकारिक अनुमति देता आ रहा है तो अब अचानक इसे अतिक्रमण बताना कानून के सिद्धांतों के विपरीत है। 800 साल पुरानी आस्था के केंद्र को बिना गहन न्यायिक जांच के क्षति पहुचाना मौलिक अधिकारों का हनन है। जब तक ‘उम्मीद’ पोर्टल एवं वक्फ पंजीकरण की विधिक प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती तब तक इस स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का लिखित आदेश पारित किया जाए। उपरोक्त तथ्यों एवं 20 वर्षों के प्रशासनिक साक्ष्यों को संज्ञान में लेकर वन विभाग की कार्यवाही पर तत्काल रोक लगाएं एवं आगामी उर्स के आयोजन की अनुमति हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करें। ज्ञापन देने वालों में मो. गुलशेर, इमरान, सोहेल, मो. इमरान, शिबू तौकीर, मो. शकील, शमशाद, सलीम, मो. दिलशाद, शहनशाह खान, सरफराज, मोहसिन आदि प्रमुख हैं। डीएम को ज्ञापन देने जाते मो. गुलशेर व अन्य।

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