अलविदा जुमा की नमाज अदा कर मांगी गई दुआएं

हजारों लोगों ने पुर सुकून अंदाज़ में अदा की अलविदा जुमे की नमाज़

अगर तीस रोज़े पूरे हुए तो पड़ सकता है एक और अलविदा

करंट विज़न संवाददाता

फफूंद (औरैया)। मज़हबे इस्लाम का सबसे मुकद्दस माह रमजानुल मुबारक चल रहा है । माह रमज़ान का चौथा जुमा को अलविदा जुमा के रूप में मनाया गया यूँ तो रमज़ान के हर जुमा में अन्य जुमा के अनुसार भीड़ ज़्यादा होती है मगर अलविदा जुमा की नमाज़ में ईद की नमाज़ की तरह नमाज़ियों की संख्या होती है और दूर दराज से मुस्लिम समुदाय के लोग अपनी नज़दीक पड़ने वाली मस्ज़िदों में अलविदा जुमा की नमाज़ अदा करने के लिए पहुंचते हैं। शुक्रवार 23 रमज़ान को मस्जिदों में अमन के साथ सामूहिक रूप से अलविदा जुमा की नमाज अदा की गया नमाज़ के लिए पहुँचे हज़ारों लोगों ने ख़ुदा के आगे सर झुकाकर पुर अमन तरीके व अक़ीदत के साथ नमाज़ अदा कर मुल्क में अमनचैन और खुशहाली क़ायम रहने की दुआएँ माँगी गयीं। नगर के आस्ताना आलिया स्थित जामा मस्जिद में क़ारी अय्यूब चिश्ती, दरगाह पीर बुखारी शाह मस्जिद में सैयद गुलाम अब्दुस्समद मियां चिश्ती ने अलविदा जुमा की नमाज अमन व अक़ीदत के साथ अदा कराई और नमाज़ के बाद मुल्क में अमनचैन क़ायम रहने की दुआएँ मांगी गयीं।नमाज़ से पहले मस्जिदों में उलमाए इकराम ने रमज़ान की फ़ज़ीलत व और उसका एहतिराम करना तथा ईद की नमाज़ से पहले सदक -ए- फितर अदा करने तथा अपने माल की ठीक ठीक ज़कात अदा करने की जानकारी दी।जामा मस्जिद आस्ताना आलिया में मौलाना सैयद मज़हर मियां चिश्ती ने जानकारी देते हुए बताया माल की ज़कात निकलने से माल महफूज़ हो जाता है और माल में कोई कमी नहीं आती बल्कि अल्लाह की राह में माल खर्च करने से माल बढ़ता है, जो लोग अपने माल की ज़कात नहीं निकालते हैं उनका माल क़यामत के दिन सांप की शक्ल में उनके गलों में लटका दिया जाएगा। वहीं उन्होंने सदक-ए फ़ित्र और ईद की नमाज़ के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस साल सदक़-ए-फित्र की क़ीमत 60 रुपये रखी गयी है जो ईद की नमाज़ से पहले अदा करना बेहतर है उन्होंने बताया कि ईदगाह में ईद की नमाज़ आठ बजे और जामा मस्जिद आस्ताना आलिया समदिया में नौ बजे ईद की नमाज़ अदा की जाएगी। अलविदा जुमा के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से मस्जिदों के बाहर पुलिस का सख़्त पहरा रहा। अगर 29 रमज़ान को ईद का चांद नज़र नहीं आया तो आने वाले 20 मार्च शुक्रवार को एक और अलविदा जुमा पड़ सकता है।रमज़ान में पड़ने वाले अंतिम जुमा(शुक्रवार) को अलविदा जुमा कहा जाता है।अलविदा जुमा की नमाज अदा करने वालों की संख्या ईद की नमाज जैसी होती है और मस्जिदें खचाखच भरी होती हैं जहां क्षेत्र के दूर दराज़ के मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों में पहुँचकर अलविदा जुमा की नमाज़ अदा करते हैं।

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