करंट विज़न संवाददाता
नई दिल्ली। संसद में पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में विदेश राज्य मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में पासपोर्ट एवं कांसुलर सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 3 क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय—आरपीओ लखनऊ, आरपीओ गाजियाबाद और आरपीओ बरेली—के अंतर्गत कुल 6 पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSKs) और 52 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSKs) संचालित हो रहे हैं। विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आरपीओ गाजियाबाद और आरपीओ बरेली के तहत 2 PSKs और 19 POPSKs के माध्यम से नागरिकों को पासपोर्ट संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे क्षेत्र के निवासियों को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और त्वरित सेवाएं मिल रही हैं। पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम 2.0 से आई पारदर्शिता और तेजी विदेश मंत्रालय द्वारा उन्नत पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम (PSP) संस्करण 2.0 को देश के सभी 37 क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों में लागू कर दिया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के तीनों आरपीओ भी शामिल हैं। यह आईटी आधारित मिशन मोड परियोजना पासपोर्ट सेवाओं को सुरक्षित, पारदर्शी, जवाबदेह और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुई है। PSP 2.0 के तहत कई नए डिजिटल टूल्स लागू किए गए हैं, जिनसे आवेदन प्रक्रिया तेज और सरल हुई है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट सुविधा, डिजिटल भुगतान के विस्तारित विकल्प, तथा PSKs/POPSKs में फीडबैक कियोस्क की स्थापना से नागरिकों को बेहतर अनुभव मिल रहा है। शिकायत निवारण प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाया गया है, जिससे आवेदकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान संभव हो सका है। ‘Apply Anywhere in India’ योजना से बढ़ी सुविधा मंत्री ने बताया कि जून 2018 में शुरू की गई ‘Apply Anywhere in India’ योजना के तहत अब नागरिक देश के किसी भी PSK/POPSK में पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस पहल ने विशेष रूप से उन लोगों को बड़ी राहत दी है जो कार्य या अन्य कारणों से अपने गृह जनपद से बाहर रहते हैं। इसके अतिरिक्त, दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं पहुंचाने के लिए संबंधित आरपीओ के अंतर्गत पासपोर्ट मोबाइल वैन की भी नियमित तैनाती की जा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में इन मोबाइल वैन के माध्यम से ऑन-साइट पासपोर्ट प्रसंस्करण की सुविधा दी जा रही है। ई-सनद और डिजिलॉकर से पूरी तरह डिजिटल सेवाएं विदेश मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017 में शुरू किया गया e-Sanad पोर्टल दस्तावेजों के सत्यापन, अटेस्टेशन और अपोस्टिल सेवाओं को पूरी तरह संपर्क-रहित और ऑनलाइन बनाता है। यह सेवा 5 अक्टूबर 1961 के हेग कन्वेंशन के सदस्य देशों में मान्य अपोस्टिल प्रमाणन उपलब्ध कराती है। e-Sanad को डिजिलॉकर से भी जोड़ा गया है, जिससे दस्तावेजों का रियल-टाइम सत्यापन संभव हो गया है। इससे प्रक्रिया न केवल तेज हुई है, बल्कि पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ी है। विदेश राज्य मंत्री ने अपने उत्तर में संकेत दिया कि यदि देश के अन्य हिस्सों में भी सेवा-प्रदाय संबंधी चुनौतियां सामने आती हैं, तो केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी उन्नयन, डिजिटल नवाचार और सेवा विस्तार के माध्यम से नागरिकों को बेहतर, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। कुल मिलाकर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में पासपोर्ट और कांसुलर सेवाओं के क्षेत्र में हो रहे ये सुधार ‘नागरिक प्रथम’ की भावना को मजबूत करते हैं और डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को नई गति प्रदान करते हैं।
