लगातार भ्रम फैला रहा है विपक्ष, मोदी सरकार ने मजदूर व गांव दोनों को और सशक्त किया हैं- शिवराज सिंह

केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान का वक्तव्य

कांग्रेस के राज में तो भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी थी मनरेगा योजना, हम लाएं हैं पूरी पारदर्शिता- शिवराज सिंह

कांग्रेस के पास न नीयत थी, न नीति; यह वही कांग्रेस है, जिसने चुनावी फ़ायदे के लिए महात्मा गांधी जी का नाम जोड़ा-शिवराज सिंह.

समय-समय पर मनरेगा का बजट कम करने वाली कांग्रेस के नेता आज घड़ियाली आंसू बहा रहे है- शिवराज

100 दिन नहीं, अब 125 दिनों की रोजगार गारंटी, सरकार ने मजदूरों की सुरक्षा और बढ़ाई- शिवराज सिंह

काम की मांग पर सरकार की वैधानिक जिम्मेदारी तय, रोजगार से इंकार नहीं संभव- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह

समय पर काम न मिलने पर अनिवार्य बेरोज़गारी भत्ता, मजदूरी में देरी पर विलंबित भुगतान का प्रावधान- शिवराज सिंह

ग्राम सभा और पंचायत के अधिकार घटाए नहीं, अब निर्णय गांव से उठेंगे, ऊपर से नहीं थोपे जाएंगे- शिवराज सिंह

“विकसित भारत- जी राम जी” में महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को मिला प्राथमिक स्थान- शिवराज सिंह

मजदूरों को खैरात नहीं, सम्मानजनक अधिकार; सुरक्षित काम, पारदर्शी भुगतान और स्थायी आजीविका-शिवराज

विकसित भारत बनाने के लिए नया अधिनियम गांधीजी के ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भरता और श्रम के सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित- शिवराज सिंह

नई दिल्ली, केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि ग्रामीण रोजगार, ग्राम पंचायत के अधिकार और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस सहित विपक्ष द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम पूरी तरह तथ्यों से परे और भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने विकसित भारत- जी राम जी योजना के माध्यम से ग्रामीण भारत और मजदूरों के अधिकारों को पहले से अधिक मजबूत किया है, न कि कमजोर। शिवराज सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस के राज में तो मनरेगा योजना भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी थी और अब हम पूरी पारदर्शिता के साथ विकसित भारत- जी राम जी योजना लाए हैं, जिससे देशभर के मजदूरों को वास्तविक लाभ मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस का शोर सिर्फ राजनीतिक है I कांग्रेस के पास न नीयत थी, न नीति। यह वही कांग्रेस है, जिसने चुनावी फ़ायदे के लिए महात्मा गांधी जी का नाम जोड़ा। यह वही कांग्रेस है, जिसने समय-समय पर मनरेगा का बजट कम किया। यह वही कांग्रेस है, जिसने मजदूरी फ्रिज की, और आज कांग्रेसी घड़ियाली आंसू बहा रहे है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मोदी सरकार ने मांग-आधारित रोजगार को कम नहीं, बल्कि और मजबूत किया है। उनके अनुसार, वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों की जगह 125 दिनों की वैधानिक रोजगार-गारंटी दी जा रही है, जिससे मजदूरों को अधिक दिन का सुरक्षित रोजगार सुनिश्चित होगा। शिवराज सिंह ने कहा कि जो भी ग्रामीण परिवार काम की मांग करेगा, उस स्थिति में सरकार पर वैधानिक जिम्मेदारी रहेगी कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम उपलब्ध कराया जाए। यदि तय समय में काम नहीं मिलता, तो अनिवार्य रूप से बेरोज़गारी भत्ता भुगतान का स्पष्ट प्रावधान किया गया है, और यदि काम मिलने के बाद समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं होता, तो विलंबित मजदूरी भुगतान यानी देरी पर अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था की गई है।

शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि विपक्ष यह कहकर जनता को गुमराह कर रहा है कि रोजगार सुरक्षा कम की जा रही है, जबकि अधिनियम के प्रावधान स्पष्ट दिखाते हैं कि रोजगार सुरक्षा को घटाया नहीं, बल्कि और बढ़ाया गया है। 125 दिन की गारंटी, बेरोज़गारी भत्ता और विलंबित भुगतान जैसी व्यवस्था मजदूरों के अधिकार को पहले से कहीं अधिक सशक्त बनाती है।ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की शक्तियों पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब देते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि यह कहना कि ग्राम सभा और ग्राम पंचायत के अधिकार कमजोर किए जा रहे हैं, पूरी तरह निराधार है। वीबी-जी राम जी अधिनियम में ग्राम सभा, ग्राम पंचायत और स्थानीय समुदाय की भूमिका को योजना, अनुमोदन, निगरानी और सामाजिक अंकेक्षण में और मजबूत किया गया है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने बताया कि ग्राम सभा में लोगों और गाँव की जरूरतों के आधार पर कार्यों की पहचान और प्राथमिकता तय होगी, जबकि कार्यों के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन और प्रगति की नियमित निगरानी भी स्थानीय स्तर पर होगी। खर्च, भुगतान और कार्य-गुणवत्ता की सोशल ऑडिट के माध्यम से सार्वजनिक समीक्षा ग्राम सभा में अनिवार्य की गई है, ताकि पूर्ण पारदर्शिता और सामाजिक जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा कि महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को विशेष रूप से बढ़ाया गया है। शिकायत निवारण और जवाबदेही की व्यवस्थाएँ और मजबूत की गई हैं, तथा डिजिटल निगरानी के साथ स्थानीय निर्णय-प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई है।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि निर्णय ऊपर से थोपे नहीं जाएंगे; निर्णय गांव और ग्राम सभा से उठकर आगे जाएंगे। इस प्रकार, ग्राम सभा और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को न केवल सुरक्षित रखा गया है, बल्कि उसे अधिक निर्णायक, भागीदार और जवाबदेह बनाया गया है।

मजदूरों के अधिकारों पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मजदूरों को खैरात नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और स्थायी आजीविका देना है। वीबी-जी राम जी अधिनियम के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समय पर, उनके ही गाँव में काम उपलब्ध हो, सम्मानजनक मजदूरी मिले, कार्य परिस्थितियाँ सुरक्षित हों और मजदूरी का भुगतान समयबद्ध व पारदर्शी तरीके से हो।उन्होंने कहा कि मजदूरों के गाँव का समग्र विकास, स्वच्छ, समृद्ध और विकसित गाँव का निर्माण, तथा परिसंपत्तियों और आजीविका-संबंधी कार्यों से ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी सुधार इस पूरी व्यवस्था के केंद्र में है।उन्होंने दोहराया कि मजदूरों का अधिकार- सम्मान के साथ, सुरक्षा के साथ, और गारंटी के साथ- यही सरकार की प्रतिबद्धता है।

विपक्ष के आरोपों पर कि गांधीजी के नाम और विचार हटाए जा रहे हैं, शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह राजनीतिक और निराधार है। उनके अनुसार, वीबी-जी राम जी अधिनियम की मूल भावना गांधीजी के उन सिद्धांतों पर आधारित है, जिन्हें उन्होंने भारत के ग्रामीण भविष्य के लिए बताया था- ग्राम आधारित विकास, ग्राम स्वराज, आत्मनिर्भरता, श्रम का सम्मान और जनभागीदारी के साथ सामाजिक जवाबदेही।

उन्होंने कहा कि यह अधिनियम गांधीजी के “ग्राम स्वराज” की भावना को व्यवहार में उतारने का एक सशक्त कदम है, जहाँ गाँव सशक्त हों, मजदूर सम्मानित हों और विकास स्थायी हो। यही सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता है- मजदूरों का सशक्तीकरण और ग्रामीण भारत का समग्र विकास।

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