करंट विजन संवाददाता
इमरान खान
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस) सैफई के आर्थोपेडिक्स विभाग द्वारा क्योर इंटरनेशनल इंडिया ट्रस्ट के सहयोग से क्लबफुट (जन्मजात टेढ़े पैर) प्रबंधन पर पोंसेटी तकनीक आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आसपास के जिलों से आए 100 से अधिक आर्थोपेडिक सर्जनों को क्लबफुट की शीघ्र पहचान और आधुनिक पोंसेटी तकनीक से प्रभावी उपचार का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि पोंसेटी तकनीक के माध्यम से अधिकांश बच्चों के टेढ़े पैर केवल प्लास्टर द्वारा ठीक किए जा सकते हैं और बहुत कम मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने जन्म के समय ही पहचान और समय पर उपचार शुरू करने पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए पीएचसी, सीएचसी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों के सामूहिक प्रयास से जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से अभिभावकों तक सही जानकारी पहुँचाना जरूरी है।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त क्लबफुट विशेषज्ञ डॉ. मैथ्यू वर्गीज (सेंट स्टीफन हॉस्पिटल, नई दिल्ली) गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि पोंसेटी विधि क्लबफुट के उपचार की सरल, सुरक्षित और प्रभावी तकनीक है, जिससे 95 प्रतिशत से अधिक मामलों में बिना ऑपरेशन के सफल उपचार संभव है।
आर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि लगभग हर 1000 नवजात शिशुओं में से एक में क्लबफुट की समस्या पाई जाती है, जिसमें एक या दोनों पैर टेढ़े होते हैं। पोंसेटी तकनीक से बिना चीरा और बिना रक्तस्राव के इसका प्रभावी उपचार संभव है।
कार्यक्रम में डॉ. हरीश कुमार ने प्रतिभागियों को क्लबफुट की गंभीरता के आकलन के लिए पिरानी स्कोरिंग प्रणाली के महत्व की जानकारी दी।
इस अवसर पर क्योर इंटरनेशनल इंडिया ट्रस्ट और यूपीयूएमएस सैफई के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके अंतर्गत क्लबफुट एवं अन्य अंग विकृतियों से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क उपचार विश्वविद्यालय के आर्थोपेडिक्स विभाग में किया जाएगा।
कार्यक्रम में प्रो-वाइस चांसलर डॉ. रामाकांत यादव, डीन डॉ. आदेश कुमार, सीएमएस डॉ. एस.पी. सिंह, रजिस्ट्रार श्री दीपक कुमार तथा मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अमित सिंह सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, आर्थोपेडिक्स एवं पीएमआर विभाग के फैकल्टी सदस्य और रेजिडेंट्स उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल संचालन में सह-आयोजक सचिव डॉ. ऋषभ अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जबकि अंत में आयोजन सचिव डॉ. राजीव कुमार ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
