मुसलमान पूरा साल इस मुबारक महीने का इंतजार करते हैं : मुजफ्फर चिश्ती

अलविदा अलविदा माह-ए-रमज़ान अलविदा

करंट विज़न संवाददाता

फफूंद (औरैया) ।माह-ए-रमज़ान अपनी तमाम बरकतों, रहमतों और नूरानी लम्हों के साथ हमसे रुख़्सत हो रहा है। यह वह मुबारक महीना है जिसके आते ही मोमिनों के दिल खुशी और रूहानी सुकून से भर जाते हैं। सहरी और इफ्तार की बरकती घड़ियां, मस्जिदों की रौनकें, तिलावत-ए-कुरआन की सदाएं और इबादत करने वालों की दुआएं हर तरफ एक नूरानी माहौल पैदा कर देती हैं।
आस्ताना आलिया समदिया मिसबाहिया के सैय्यद मुजफ्फर चिश्ती ने फरमाया कि रमज़ान वह अज़ीम महीना है जिसमें अल्लाह तआला अपने बंदों पर खास करम फरमाता है। अहादीस में आता है कि इस महीने में नेकियों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है मग़फिरत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और जहन्नम से निजात अता की जाती है। इसी वजह से मुसलमान पूरा साल इस मुबारक महीने का इंतज़ार करते हैं। हज़रत ने आगे फरमाया कि आज जब रमज़ान हमसे रुख़्सत हो रहा है तो दिल में एक अजीब सी उदासी महसूस होती है। मस्जिदों की वह रौनकें, इफ्तार के वक्त की वह खुशियां और रातों की इबादतें अब यादों में तब्दील हो रही हैं। हमें यह सोचना चाहिए कि पता नहीं यह रमज़ान हमारी ज़िंदगी का आख़िरी रमज़ान था या अल्लाह हमें दोबारा इसकी बरकतें नसीब फरमाएगा।आख़िर में उन्होंने मुसलमानों को नसीहत करते हुए फरमाया कि हर शख्स को चाहिए कि रमज़ान में जो नेक आदतें अपनाई हैं उन्हें पूरे साल अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाए रखे और अल्लाह तआला से अपनी गलतियों और कोताहियों की माफी मांगे। अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हम सबकी इबादतों को कबूल फरमाए और हमें फिर से रमज़ान-उल-मुबारक की बरकतें नसीब करे। आमीन।

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