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कानपुर देहात के रूरा क्षेत्र बनीपारा स्थिति बाणेश्वर मंदिर में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा में बुधवार को चौथे दिन हजारों किलो मीटर दूर भक्त कथा सुनने पंडाल पहुंचे
यहां सुबह पहर आचार्य शिवम बाजपेई के द्वारा भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराया गया। यहां पहुंचे भक्तों ने रुद्राभिषेक में भाग लिया शिव महापुराण कथा में कथा व्यास राघव मिश्रा ने बुधवार को भगवान गणेश के जन्म का प्रसंग सुनाया। बताया कि गणेश जी को बुद्धि और ज्ञान का देवता माना जाता है। और बताया कि कार्तिकेय और गणेश जी दोनों भगवान शिव व माता पार्वती के पुत्र हैं। एक बार माता पार्वती ने अपने शरीर की मैल से एक पुतला बनाया और उसे जीवित करने के लिए भगवान शिव की तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उस पुतले में जान डाल दी और इस तरह गणेश जी का जन्म हुआ। जब भगवान शिव ने गणेश जी को देखा, तो उन्होंने उन्हें नहीं पहचाना और गलती से उनका सिर काट दिया। माता पार्वती ने अपने पुत्र की मृत्यु के बाद भगवान शिव से उसे जीवित करने का अनुरोध किया। भगवान शिव ने अपने गणों को उत्तर दिशा में जाने और पहले जीव को ढूंढने का आदेश दिया, जिसका सिर काटकर गणेश जी के धड़ पर रखा जा सके। भगवान शिव के गणों ने एक हाथी का सिर काटा और उसे गणेश जी के धड़ पर रख दिया, जिससे गणेश जी का गजानन रूप बना। इस तरह गणेश जी को पुनर्जीवित किया गया व उन्हें अद्वितीय रूप मिला। इस दौरान प्रदीप मिश्रा कानपुर वाले,कुशाग्र कौशल उन्नाव के अलावा समिति के रामकृष्ण,विनोद सिंह गौर,रोहित सिंह,लल्लन गुप्ता,राघवेंद्र सिंह,देवेंद्र सिंह,सोनी भदौरिया,मोनू पंडित,शिवम्, अनुज सविता,रजनी कांत,शिवम चक्रवर्ती,लालू सोनी,नमन सिंह रुद्र प्रताप,लकी,हर्ष, प्रिया,मोनिका,आयुषी आदि लोग रहे।शिवमहापुराण में राज्यमंत्री अजीत पाल व विधायक पूनम सँखवार ने कथा व्यास जी का माल्यार्पण कर आरती में भाग लिया। इस दौरान भक्तों का सैलाब मौजूद रहा।
बनीपारा जिनई स्थित मंदिर प्रांगण में चले रही सात दिवसीय शिव महापुराण के चौथे दिन कथा व्यास राघव मिश्रा जी ने गजानन के जन्म का वृतांत सुनाया।
