देश को आजाद कराने के लिए आजाद हिंद फौज का हुआ था गठन. भारतीय आर्मी की होती है कुछ गरिमा.
करंट विज़न संवाददाता
कानपुर देहात मार्च माह. कभी गुलामत की जंजीरों में भारत देश जकड़ा हुआ था जनसंख्या करीब 36000 थी आय के सभी स्रोत बंद थे भुखमरी का माहौल था देश में त्राहि त्राहि की स्थिति बनी हुई थी अंग्रेज लोगों का शासन था सजा बहुत शक्ति थी यहां तक गली से जब चौकीदार निकल जाता था तब लोगों की रूह कांप जाती थी देश को आजाद कराने के लिए देश के हर प्रदेश में हर जिले में तहसील ब्लाक थाना स्तर पर एक से बढ़कर एक वलदानी लोग अंग्रेजों से जंग लड़ने के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए जंगे मैदान में उतर गए इस समय देशभक्ति सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज की घोषणा कर दी पूरे देश में सुभाष चंद्र बोस की सेना अंग्रेजों पर हमलावर हो गई 1947 में हिंदुस्तान को विजय मिली और अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा. इसी क्रम में विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिला उपाध्यक्ष डॉ सुरेश त्रिवेदी ने कहा है कि देश में भारतीय फौजी आर्मी के नाम पर राजनीतिक पार्टियों बनाने लगे हैं इस व्यवस्था पर माननीय न्यायालय सर्वोच्च एवं केंद्र सरकार को तत्काल रोक लगा देनी चाहिए अभी तो राजनीतिक पार्टियों आर्मी बना रही हैं फिर धीरे-धीरे इसमें ब्रिगेडियर कप्तान सूबेदार हवलदार बनने लगेंगे इससे हमारे जांबाज मिलिट्री के जवानों के मनोबल पर गहरा प्रभाव पडता दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियों भारतीय फौज के नाम पर नाम रख लेना जो घोर गलत है सीमा सरहद पर लगी फौजी की गरिमा पर ठेस पहुंचाना जैसा दर्शाता है राजनीतिक पार्टियों एवं उनके संगठन मिलिट्री के उपनाम रखना किसी सैन्य बल की छवि खराब करना दर्शाता है इस पर सरकार को तत्काल प्रतिबंध लगाना चाहिए।
