रक्तरंजित भारत पुस्तक ‘पर परिचर्चा

विद्वानों ने भारत विभाजित क्यों हुआ पर किया विमर्श

करंट विज़न संवाददाता

दिबियापुर। नगर में प्रज्ञा प्रवाह की कानपुर प्रांत की इकाई ब्रह्मावर्त परिषद द्वारा संचालित शोध/अध्ययन केंद्र द्वारा पुस्तक परिचर्चा तथा विषय परिचर्चा का आयोजन किया गया। चर्चित पुस्तक ‘रक्तरंजित भारत’परिचर्चा प्रस्तुत की गई। पुस्तक की समीक्षा जागरण इंस्टिट्यूट में असिस्टेंट प्रोफेसर रजत दुबे ने विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत कर पुस्तक की सारगर्भित सभी अध्यायों के बारे में बताया। वर्तमान भारत में पीएफआई की घातक कार्य प्रणाली और आतंकवाद के विभिन्न खतरों के बारे में बताया। आतंकवाद के नए स्वरुप को बलि देने के दलित मुस्लिम गठजोड़ की भ्रामक अवधारणा के बारे में बताया। परिचर्चा को रोचक बनाते हुए पुस्तक के लेखक और श्यामा प्रसाद मुख़र्जी रिसर्च फाउंडेशन नई दिल्ली के निदेशक विनय सिंह परिचर्चा में ऑनस्क्रीन जुड़े। उन्होंने पुस्तक लिखने में प्रेरणा का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि प्रतिबंधित पीएफआई, सिमी का ही नया संस्करण था। आज भी वह नए रूप में अवतरित होने का प्रयास कर रहा है इसके लिए वह आधुनिक ज्ञान विज्ञान, तकनीक का प्रयोग कर रहा है इसके लिए सरकार और समाज दोनों को सजग रहना होगा। परिचर्चा में प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्रीय संयोजक भगवती प्रसाद राघव और अखिल भारतीय टोली के सदस्य भी आभासी माध्यम से जुड़े।नगर के नगर पंचायत सभागार में परिचर्चा की शुरुआत प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत संयोजक मुनीश त्रिपाठी ने अतिथि का परिचय कराते हुए की । पुस्तक परिचर्चा के बाद दूसरे सत्र में भारत का विभाजन क्यों हुआ पर परिचर्चा हुई। इस परिचर्चा में डॉ अनुरुद्ध प्रताप भवर जी, प्रोफेसर कौशलेन्द्र तिवारी, सुबेन्द्र सिंह, कमलेश तिवारी,मनीष यादव, सत्या राजपूत, संदीप शर्मा, देवेंद्र राजपूत सहित, सुधाकर भट्ट , विनीत त्रिपाठी, सुशांत नवीन तिवारी, चिंतन सहित कई गणमान्य विद्वानों ने अपने विचार रखे .।

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