संवाददाता
करंट विज़न इमरान खान
जनपद में स्मार्ट मीटर लगने के बाद करीब 1800 उपभोक्ता पिछले 5–6 महीनों से बिजली बिल न मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि वे नियमित रूप से हर महीने बिल जमा करना चाहते हैं, लेकिन बिल जारी न होने के कारण उन्हें विभाग और कंपनी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
पीड़ित उपभोक्ताओं का कहना है कि वे मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं और एकमुश्त भारी बिल भर पाना उनके लिए संभव नहीं होगा। उन्हें आशंका है कि यदि कई महीनों का बिल एक साथ जारी किया गया तो उस पर चक्रवृद्धि ब्याज भी लगाया जाएगा, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ जाएगा।
उपभोक्ताओं के अनुसार, जब वे बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि स्मार्ट मीटर का टेंडर जीनस कंपनी को दिया गया है, इसलिए उसी से संपर्क करें।
वहीं जीनस कंपनी के कार्यालय में जाने पर उपभोक्ताओं को फिर से बिजली विभाग भेज दिया जाता है। इस आपसी टालमटोल से लोग खासे परेशान हैं।
मीडिया द्वारा जीनस कंपनी के सर्किल इंचार्ज अंकित से बात करने पर उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि “2–3 दिन में बिल आ जाएगा।” हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें यही आश्वासन पिछले कई महीनों से दिया जा रहा है।
वहीं बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने का पूरा कार्य और जिम्मेदारी कंपनी के पास है। विभाग केवल लिखित शिकायत आगे बढ़ा सकता है, सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस समस्या का जिम्मेदार कौन है—बिजली विभाग या जीनस कंपनी? जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होती और व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक आम उपभोक्ता ही परेशान होते रहेंगे। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर समस्या का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है।
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