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इटावा। ज्ञानस्थली विद्यालय में बसंत पंचमी व नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की जयंती को बड़े ही हर्ष के साथ मनाई गई। विद्यालय प्रांगण में ज्ञानस्थली विद्यालय समिति के उपाध्यक्ष वाइस चेयरमैन विनीत यादव ने मां सरस्वती व सुभाषचन्द्र बोस की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्पहार किया।कार्यक्रम सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा देश महान स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी नेता, सच्चे देशभक्त सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मना रहा है। नेताजी की जयंती 23 जनवरी को पूरा देश पराक्रम दिवस के तौर पर मनाता है। तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा….! जय हिन्द। जैसे नारों से आजादी की लड़ाई को नई ऊर्जा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान का कोई सानी नहीं है। वे एक साहसी और स्वतंत्रता के प्रति अति उत्साहित नेता थे। सुभाष चंद्र बोस का साहस और नेतृत्व कौशल जबरदस्त था। वे असाधारण वक्ता थे। वे खुद तो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल थे ही, साथ ही उन्होंने अन्य कई लोगों को भारतीय राष्ट्रीय सेना में शामिल होने और भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया था। तत्पश्चात कार्यक्रम में बसंत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदू पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। बसंत पंचमी का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी है।बसंत पंचमी का त्योहार हमें यह भी याद दिलाता है कि हमें अपने पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए। बसंत पंचमी हमें यह संदेश देती है कि हमें पेड़-पौधे लगाने चाहिए। कार्यक्रम में विधि-विधान के साथ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना व हवन किया गया तथा प्रसाद में मिष्टान्न आदि का वितरण किया गया। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य अंशुल तिवारी, विद्यालय प्रबंधन समिति प्रमुख शिवमंगल, खेल विभाग प्रमुख वासिफ खान, वित्त विभाग प्रमुख नीरज त्रिपाठी व विद्यालय परिवार के सभी शिक्षकगण उपस्थित रहे।
