करंट विजन संवाददाता
इमरान खान
इटावा से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चौपला निवासी संजेश कुमार पिछले 5–6 दिनों से अपनी पत्नी दीक्षा के इलाज के लिए जिला अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक समुचित उपचार नहीं मिल सका है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीक्षा का कान बच्चे द्वारा कुंडल खींचे जाने से फट गया था, जिसके लिए तत्काल टांके लगाना आवश्यक था। ऐसी स्थिति में समय पर प्राथमिक उपचार बेहद जरूरी होता है, लेकिन अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों की कथित लापरवाही के चलते इलाज में देरी होती रही।
आरोप है कि कमरा नंबर 121 में तैनात डॉक्टर राहुल आनंद द्वारा मरीज को कई दिनों तक टालमटोल किया गया और उपचार के बजाय इधर-उधर भटकाया जाता रहा। सबसे गंभीर आरोप यह है कि डॉक्टर ने जिला अस्पताल में इलाज करने के बजाय मरीज को अपने निजी क्लिनिक पर आने की सलाह दी।
यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि गरीब और दूर-दराज से आने वाले मरीजों के साथ अन्याय भी है। लोग 40–50 किलोमीटर दूर से जिला अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन उन्हें राहत के बजाय परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, जहाँ कुछ चिकित्सक अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए निजी लाभ को प्राथमिकता देते नजर आते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन से अपेक्षा है कि वह तुरंत संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जिला अस्पताल के सीएमएस परुतोष शुक्ला ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि डॉक्टर द्वारा मरीज को निजी क्लिनिक बुलाने की बात सही पाई जाती है, तो संबंधित के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
