-केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधनी में यादव समाज के प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए
- आधुनिक हैं सांदीपनी विद्यालय- खेल, कला और संगीत की भी व्यवस्था
- हर बच्चा अनंत शक्तियों का भंडार है
- टॉपर छात्रों के लिए प्रेम सुंदर सम्मान योजना
- क्षेत्र के दिव्यांगों को मोटराइज्ड साइकिल दी जाएगी
- यदुवंश अद्भुत है, जिसकी कीर्ति द्वापर युग से लेकर आज तक अमर है
भोपाल, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के प्रवास पर थे। शिवराज सिंह ने शाहगंज में नवनिर्मित शासकीय सांदीपनी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का लोकार्पण किया। वहीं बुधनी में आयोजित यादव समाज के प्रतीभा सम्मान समारोह में भी शिवराज सिंह चौहान ने शिरकत की। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री ने बच्चों को अपने बचपन से जाप किए जाने वाले गायत्री मंत्र का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि, ओम- परमात्मा या भगवान का नाम है। ‘भू’ जीवन देने वाला है, ‘र्भुवः’ दुःख दूर करने वाला, और ‘स्वः’ सुख देने वाला है। ‘तत्सवितुर्वरेण्यं’ का मतलब है कि, तेरे अलावा और कौन है जिसे मैं भजूं। ‘भर्गो देवस्य धीमहि’ का अर्थ है मैं तेरे तेजस्वी स्वरुप का ध्यान करता हूं, और ‘धियो यो नः प्रचोदयात्’ का मतलब है मेरी बुद्धि को अच्छे मार्ग पर ले चल। वहीं शिवराज सिंह ने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि, वो इस मंत्र का जाप करें और इसका अर्थ समझें, ताकि उनके जीवन में सही दिशा और बुद्धि का विकास हो सके।
हर बच्चे में अपार क्षमता है
केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, हम केवल भौतिक शरीर नहीं हैं। यह संसार, यह धरती, पृथ्वी, ब्रह्मांड बहुत बड़ा है। एक सूरज, एक चंद्रमा ही नहीं, बल्कि कई ग्रह, नक्षत्र, तारे, मंगल, गुरु, शुक्र और अनगिनत आकाशगंगाएँ हैं। इसे संचालित करता है एक परमपिता परमात्मा, और हमें उससे अपना रिश्ता जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि, हम एक बूंद हैं, अगर हम सागर में मिल जाएँ तो समुद्र बन जाते हैं। मैं भी जुड़ने की कोशिश करता हूँ। बेटा-बेटियों, तुम भी जुड़ने की कोशिश करो। हम केवल हाड-मांस के पुतले नहीं हैं। हर व्यक्ति ईश्वर का अंश है, अमृत का पुत्र या पुत्री है, अनंत शक्तियों का भंडार है और अमर आनंद का भागी है। शिवराज सिंह ने कहा कि, हर बच्चे में अपार क्षमता है। कोई कमज़ोर नहीं है, कोई अधिक बुद्धिमान नहीं है। भगवान ने सबको बराबर-बराबर शक्ति दी है। जो इसे सही दिशा में उपयोग करते हैं, वे बड़े-बड़े काम कर सकते हैं। हमारे मस्तिष्क का केवल एक छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल होता है। अगर हम इसका पूरा उपयोग कर लें, तो चमत्कार कर सकते हैं।
सर्व-सुविधायुक्त है सांदीपनी स्कूल
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि, सांदीपनी स्कूल सर्व सुविधा युक्त है और यहाँ पढ़ाई के साथ-साथ खेल, कला और संगीत की भी पूरी व्यवस्था है। स्कूल में मल्टीपरपस हॉल, 50 सीटर कॉन्फ्रेंस रूम, मॉड्युलर फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स लैब, सीनियर और जूनियर कंप्यूटर लैब, कला और संगीत कक्ष उपलब्ध हैं। इसके अलावा यहाँ सीनियर और जूनियर लाइब्रेरी, स्टाफ रूम, प्रिंसिपल और हेड मास्टर के कमरे भी हैं। सुरक्षा और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा गया है। स्कूल में अग्निशमन प्रणाली, मिड-डे मील भवन और मॉड्युलर किचन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, बायो डाइजेस्टर, हॉर्टिकल्चर व्यवस्था सहित ट्रांसफार्मर गेट, पार्किंग, कंक्रीट सड़कों और पानी निकासी की सुविधा है। उन्होंने कहा कि, स्कूल में रनिंग ट्रैक, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी और खो-खो के मैदान बनाए गए हैं। उन्होंने कहा, पढ़ाई के साथ खेल भी ज़रूरी है। खेल शरीर को स्वस्थ रखते हैं, मन को प्रसन्न बनाते हैं और व्यक्तित्व का विकास करते हैं। सभी क्लासरूम, स्टाफ रूम और लैब में स्मार्ट क्लास, नया फर्नीचर, लैब उपकरण और सोलर पैनल की व्यवस्था भी है। केन्द्रीय मंत्री ने प्रिंसिपल और स्कूल स्टॉफ के प्रयासों की सराहना की।
टॉपर्स को प्रेम सुंदर सम्मान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संसदीय क्षेत्र के दसवीं और बारहवीं के छात्रों के लिए विशेष योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस साल के बोर्ड परिणामों में फर्स्ट, सेकंड और थर्ड रैंक पाने वाले छात्रों को माता-पिता के नाम पर ‘प्रेम सुंदर सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, छात्रों के लिए सम्मान निधि के रूप में आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसका इस्तेमाल वे अपनी आगे की पढ़ाई में कर सकेंगे। ये योजना इस साल की दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परिणामों से लागू होगी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, इससे होड़ लग जाएगी कि कौन आगे आए। मेहनत से पढ़ो और आगे बढ़ो। मेरी अनंत शुभकामनाएं और आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ हैं। शिवराज सिंह ने कहा कि, मैं नेता नहीं हूँ, मैं तुम्हारा मामा हूँ, जो तुम्हें प्यार करता है और तुम्हारे जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश करता है, ताकि तुम देश और प्रदेश के काम आ सको। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने अपने संसदीय क्षेत्र में दिव्यांग, स्ट्रीट वेंडर और कारीगरों के लिए भी योजनाओं की घोषणा करते हुए कहा कि, अपने क्षेत्र के सभी दिव्यांगों को मोटराइज्ड साइकिल दी जाएगी, ताकि उन्हें यात्रा में कोई कठिनाई न हो। इसके अलावा, जो लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से अभी तक वंचित हैं, उन्हें योजनाओं से जोड़ने का काम करेंगे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकास कार्यों की गति तेज रहेगी और घर निर्माण, सड़क निर्माण जैसी परियोजनाओं में भी तेजी लायी जाएगी।
यदुवंश के पास गौपाल, गौ-माता और गीता है
केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधनी में आयोजित यादव समाज के प्रतिभा सम्मान समारोह में संबोधित करते हुए कहा कि, यदुवंश अद्भुत है, जिसकी कीर्ति द्वापर युग से लेकर आज तक अमर और अजर है। यह यदुवंश का ही प्रेम है कि, सृष्टि का सृजन और संहार करने वाला परमात्मा भी इसी वंश में जन्म लेता है। अगर प्रेम की प्रतिमूर्ति कोई है, तो वह कन्हैया को गोद में खिलाने वाली यशोदा मैया हैं। यदुवंश वह दिव्य वंश है, जिसकी गोद में निर्गुण-निराकार परमेश्वर भी सगुण और साकार रूप में अवतरित होता है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धन्य है वह समाज, जिसने भगवान श्रीकृष्ण का सान्निध्य पाया। जिसने इंद्र के अहंकार को चुनौती दी और गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाकर यह संदेश दिया कि, अहंकार किसी का स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, यदुवंश के पास गोपाल भी हैं, गौ-माता भी हैं और गीता जी भी हैं। कन्हैया ने गीता के माध्यम से पूरे विश्व को आश्वस्त किया कि, जब-जब धर्म की हानि होगी, अधर्म बढ़ेगा, तब-तब मैं धर्म की रक्षा के लिए इस धरती पर अवतार लूंगा। अन्न के भंडार भरने हों, तो यादव समाज है। यह समाज परिश्रम, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने वाला समाज है। जो कण-कण में कृष्ण को और जन-जन में जगदीश को देखे, वही यदुवंशी है। जो अन्याय पर विजय पाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दे, वही यदुवंशी है। उन्होंने कहा कि, जो गौ-माता और गाँव की सेवा को ही गोविंद की पूजा मान ले, जो देश की मिट्टी को अपने माथे का चंदन समझे, वही यदुवंश है। यदुवंश का चरित्र केवल परंपरा नहीं, बल्कि कर्म और कर्तव्य से निर्मित होता है। जो हाथ में हल लेकर अन्न के भंडार भरता है और जब देश को आवश्यकता पड़े तो सुदर्शन चक्र भी धारण कर ले वही यदुवंश है।
