विश्व कुष्ठ रोग दिवस पर गांधी जी के चित्र पर माल्यार्पण करते अधीक्षक डॉक्टर विजय आनंद
दिबियापुर ।सीएचसी पर शुक्रवार को विश्व कुष्ठ रोग दिवस के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान आमजनमानस को कुष्ठ रोग के लक्षण और इलाज के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि कुष्ठ रोग लाइलाज बीमारी नहीं है, बल्कि इसका सफल इलाज है ।सीएचसी प्रभारी डॉ. विजय आनंद ने गोष्ठी में जानकारी देते हुए बताया कि कुष्ठ रोग के सामान्य लक्षणों में शरीर पर कोई भी ऐसा दाग या धब्बा शामिल है, जिस पर सुन्नपन हो, खुजली न होती हो और पसीना न आता हो। ऐसे लक्षण कुष्ठ रोग के संकेत हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर जांच और इलाज न कराने पर विकलांगता आ सकती है। डॉ. आनंद ने बताया कि त्वचा के धब्बे अक्सर उभरे हुए किनारों वाले होते हैं, जो आसपास की त्वचा से अलग दिखते हैं। ये धब्बे फीके, पीले, लाल, मोटे, कठोर या सुन्न हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, लाल या बैंगनी रंग की गांठें, पैरों के तलवे पर दर्द रहित अल्सर, पैरों में बढ़ी हुई नसें, कमजोरी, पलकों का झड़ना, दृष्टि हानि या अन्य नेत्र संबंधी समस्याएं भी कुष्ठ रोग के धीरे-धीरे विकसित होने वाले लक्षण हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत सीएचसी आकर जांच करवाएं और मुफ्त इलाज का लाभ उठाएं। इस समय 10 कुष्ठ रोगियों का इलाज चल रहा है। उपचार के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि पीबी (पॉसी बेसिलरी) श्रेणी के मरीजों का छह माह तक और एमबी (मल्टी बेसिलरी) श्रेणी के मरीजों का 12 माह तक इलाजवर्तमान में भाग्यनगर ब्लॉक में 10 कुष्ठ रोगियों का इलाज चल रहा है। उपचार के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि पीबी (पॉसी बेसिलरी) श्रेणी के मरीजों का छह माह तक और एमबी (मल्टी बेसिलरी) श्रेणी के मरीजों का 12 माह तक इलाज किया जाता है, जिससे वे पूर्णतया ठीक हो जाते हैं। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. सऊद अहमद, डॉ. अब्दुल करीम, कुष्ठ रोग विभाग के अनिल मिश्रा, मनीषा देवी सहित अश्वनी कुमार, हिमांशु चंदन, विवेक त्रिवेदी और अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
