करंट विज़न संवाददाता
कानपुर देहात के चिरौरा गांव के बीच में फैक्ट्रियों से निकलने वाला दूषित कचरा और गंदा पानी खुलेआम नालों, नदियों और खेतों में डाला जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सिलसिला कई महीनों से चोरी-छिपे चल रहा है, जिससे गांव का वातावरण जहरीला होता जा रहा है।
ग्रामीण महिलाओं सावित्री, संतोशी और शिव मोहन का कहना है कि तेज बदबू, सांस लेने में दिक्कत, त्वचा रोग और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। खेतों में कचरा गिरने से फसलों को नुकसान और किसानों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मनोज चौरसिया ने मीडिया से बात करने से इनकार करते हुए कहा कि फोटो मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
हैरानी की बात यह है कि पीसीबी का दफ्तर वहीं मौजूद होने के बावजूद प्रदूषण पर प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
माघ मेले को लेकर शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि नदियों में दूषित पानी न जाए, फिर भी रनिया में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
सवाल: आखिर रनिया के लोगों को प्रदूषण से कब मिलेगी राहत?
ग्रामीणों ने तत्काल जांच और दोषी फैक्ट्रियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
