जो अली का नहीं वो खुदा का नहीं, जो नबी का नहीं वो अली का नहीं —–

शरीफ मंज़िल में मौला अली की पैदाइश पर हुई महफ़िल

करंट विज़न संवाददाता
इटावा। मौलाए कायनात हज़रत अली की पैदाइश के खुशनुमा मौके पर राहत अक़ील की ओर से शरीफ मंज़िल सैदबाड़ा में महफ़िल का आयोजन किया गया। महफ़िल में शायरों ने मौला अली की शान में बेहतरीन कलाम पेश किए।
महफ़िल का शुभारंभ मौलाना अनवारुल हसन ज़ैदी इमामे जुमा इटावा ने कुरान पाक की तिलावत से करते हुए कहा मौला अली की पैदाइश काबे में हुई यह मर्तबा न किसी और को मिला है और न ही कयामत तक किसी को मिलेगा। इसी तरह खाने काबे पर अली के बाद खुतबा देने का मर्तबा मौला अब्बास को मिला। इसके अलावा काबे में खुतबा देने का किसी को मर्तबा नहीं मिला। सलीम रज़ा ने कहा रंजो अलम मिटाते हैं मौलाये कायनात, मुश्किल में काम आते हैं मौलाये कायनात। अख्तर अब्बास मोंटू ने कहा निशा दीवार का ये आज भी इकरार करता है, काबा टूटकर मौला अली से प्यार करता है। तनवीर हसन ने कहा अली अली है खुदा नहीं है मगर खुदा से जुदा नहीं है, खुदा नहीं है तुम्हारे दिल मे अगर अली की विला नहीं है। अमीर वारसी ने कलाम पेश करते हुए कहा जो अली का नहीं वो खुदा का नहीं, जो नबी का नहीं वो अली का नहीं। सलमान रिज़वी ने कहा अली को कौन समझेगा कहां पर फैसला होगा, अली क्या हैं अली जाने अली को ही पता होगा। आसिफ रिज़वी अश्शू ने कहा मनाओ जश्न कि काबे में आ रहे हैं अली, खुदा के घर का मुकद्दर जगाने आ रहे हैं अली। मोहम्मद सादिक ने कहा नहीं है कोई अली से बेहतर कोई नहीं, सिवा नबी के अली से बेहतर कोई नहीं। तसलीम रज़ा, सफीर हैदर, ताबिश रिज़वी, आबिद रज़ा, अर्श ने भी कलाम पेश किए। महफ़िल में हाजी अरशद मरगूब, मो. मियां, शावेज़ नक़वी, राहत हुसैन रिज़वी, अयाज हुसैन, आदिल अख़्तर गुडडू, ज़हूर नक़वी, जहीर अब्बास, मो. अब्बास, हसन अब्बास, परवेज हसनैन, शब्बर अक़ील, राहिल सग़ीर, शहजादे, मो. जुनैद, मो. जावेद, शानू, अली साबिर, राजा, मो. अहमद, आतिफ एड., अदनान जाफरी, मिनहाज नक़वी, सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर मौला अली की पैदाइश का जश्न मनाया।

महफ़िल में कलाम पेश करते आमिर वारसी।

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