सावरकर की पुस्तक ‘छह स्वर्णिम अध्याय’ पर परिचर्चा विद्वानों ने ‘सेक्युलर’ शब्द के गलत प्रयोग पर जताई चिंता

फोटो परिचय ।परिचर्चा में भाग लेते विद्वान

दिबियापुर। कस्बे में प्रज्ञा प्रवाह की कानपुर प्रांत इकाई ब्रह्मावर्त परिषद ने एक पुस्तक एवं विषय परिचर्चा का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में स्वातंत्र्यवीर विनायक सावरकर की पुस्तक ‘भारतीय इतिहास के छह स्वर्णिम अध्याय’ पर चर्चा की गई। साथ ही, भारत की राजनीति में ‘सेक्युलर’ शब्द के गलत प्रयोग पर भी विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए।नगर पंचायत सभागार में आयोजित इस परिचर्चा की शुरुआत प्रज्ञा प्रवाह के जिला संयोजक आशीष मिश्रा ने कार्यक्रम की प्रस्तावना से की। स्तंभकार, इतिहासकार और लेखक मुनीश त्रिपाठी ने पुस्तक की विषयवस्तु पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि चाणक्य ने आक्रमणकारियों के खिलाफ जनआंदोलन चलाकर चंद्रगुप्त मौर्य के नेतृत्व में नागरिक सेना तैयार की। इस सेना ने यूनानियों को भारत से खदेड़ा और मगध के नंदवंश को पराजित कर भारतीय राज्यों का एकीकरण किया। त्रिपाठी ने पुष्यमित्र शुंग, यशोवर्धन और चंद्रगुप्त विक्रमादित्य जैसे शासकों के गौरवपूर्ण इतिहास का भी उल्लेख किया।भारतीय समाज में सेक्युलर शब्द के दुरुपयोग’ विषय पर मनीष यादव ने अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से इस शब्द ने हिंदुओं को बहुत दबाया है, जबकि इसका वास्तविक आशय कुछ और है और इसका प्रयोग कुछ और ही होता रहा है। परिचर्चा में आचार्य राघवेंद्र शुक्ला, डॉ. सुबेंद्र सिंह, विशाल दुबे, रामजी मिश्रा, सत्या राजपूत, डॉ. सुरेंद्र चौहान, देवेंद्र राजपूत, डॉ. अतुल मिश्रा, सुशांत त्रिपाठी, हरिश्चंद्र पोरवाल, नवीन तिवारी और मनोहर राजपूत सहित कई मनीषियों ने अपने विचार साझा किए। मुख्य अतिथि इतिहासविद नरेश वर्मा ने कहा कि हमें प्रचलित शब्दभेदों को वास्तविक और राजनैतिक रूप से समझना होगा, तभी हम सत्य के नजदीक पहुंच सकेंगे। कार्यक्रम के अंत में कवि अरुण दीक्षित ने वीर रस की कविता का पाठ कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अध्यक्षीय संबोधन देते हुए संस्कृत भारती के जिला संयोजक सुधाकर भट्ट ने संस्कारों द्वारा देश निर्माण पर बल दिया। परिचर्चा का सफल संचालन आशीष मिश्रा ने किया।

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